Tuesday, October 06, 2009

प्रीत की पंख्तियाँ

प्रीत की पंख्तियाँ

तेरी हाथों की मेहेंदी में लिख दूं अपना नाम
तेरी हाथों की मेहेंदी में लिख दूं अपना नाम
इन रगों के बहते खून से करून हमारे प्रीत को सलाम

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तेरी आँखों की आसूंओं से सजाऊँ दुनिया सारी 
बूँद बूँद सागर में मिलाऊँ प्यार सारी
न यह प्यास रहेगी न मैं प्यासा 
दिल में बस जाओ तुम बस यही है दिल की आशा
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कर दूं अपने आप को इस तरह तेरे हवाले 
कर दूं अपने आप को इस तरह तेरे हवाले
के याद न आए ,जग सारा न याद आए दुख सारे
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इन ज़ख्मों से बहता हुआ खून तुझे बुलाए
इन रातों के सापनो में तू ही याद आए
कही तनहा न कट जाए ज़िन्दगी 
यही सोचकर दिल घबराए ....

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this is dedicated to my hindi teachers Mrs Asha(hope i din't make any spelling mistakes)

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